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हर साल ITR सीज़न के आस-पास, हर फैमिली WhatsApp ग्रुप में एक ही सवाल उठता है: old tax regime में रहें या new में शिफ्ट करें? ईमानदार जवाब है — यह पूरी तरह आपके नंबर्स पर निर्भर करता है। यहां old vs new tax regime kya chunein का पूरा कंपैरिज़न आसान भाषा में दिया गया है, ताकि आप अंदाज़ा लगाने के बजाय असल में फैसला ले सकें।

Quick Facts: Old vs New Tax Regime

  • New tax regime अब डिफॉल्ट है — जब तक आप खुद ऑप्ट-आउट नहीं करते, आप अपने आप इसी में हैं
  • New regime के तहत, Section 87A रिबेट की वजह से ₹12 लाख तक की इनकम असल में टैक्स-फ्री है
  • Old regime अभी भी 80C, 80D, और HRA जैसे डिडक्शन्स की इजाज़त देता है; new regime में ज़्यादातर नहीं मिलते
  • सैलरीड कर्मचारियों को दोनों रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है
  • अगर आपकी बिज़नेस इनकम नहीं है, तो हर साल रीजीम बदल सकते हैं
  • Income Tax Act, 2025 ने 1 अप्रैल 2026 से 1961 वाले एक्ट की जगह ली है, लेकिन old-vs-new का चुनाव उसी तरह काम करता है

Old vs New Tax Regime: असल में फर्क क्या है

Old vs new tax regime kya chunein बहस का मूल ट्रेड-ऑफ आसान है: कम टैक्स रेट्स लगभग बिना डिडक्शन के, बनाम ज़्यादा टैक्स रेट्स लंबी एक्सेम्प्शन लिस्ट के साथ। New regime एक बड़ा टैक्स-फ्री ब्रैकेट और आसान फाइलिंग देता है। Old regime उन लोगों को फायदा देता है जो एक्टिवली टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं और किराया या होम लोन EMI चुकाते हैं।

Old Regime अभी भी कहां जीतता है

अगर आप HRA क्लेम करते हैं, Section 24(b) के तहत होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन वाला एक्टिव होम लोन है, ELSS, PPF या लाइफ इंश्योरेंस में 80C के तहत भारी निवेश करते हैं, या 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के लिए भुगतान करते हैं, तो old regime असल में सस्ता पड़ सकता है — कभी-कभी काफी बड़े मार्जिन से। सीनियर सिटीज़न्स को भी old regime में ज़्यादा बेसिक एक्सेम्प्शन लिमिट मिलती है।

New Regime कहां जीतता है

अगर आपकी सैलरी स्ट्रक्चर में ज़्यादा HRA नहीं है, आपका होम लोन नहीं है, और आप टैक्स डिडक्शन के लिए एक्टिवली निवेश नहीं कर रहे, तो new regime के कम स्लैब रेट्स और ज़्यादा इफेक्टिव टैक्स-फ्री थ्रेशोल्ड आमतौर पर बेहतर पड़ते हैं — और फाइलिंग के वक्त काफी कम पेपरवर्क भी।

असल में फैसला कैसे लें

  1. वो हर डिडक्शन लिस्ट करें जो आप old regime में क्लेम कर सकते हैं: 80C, 80D, HRA, होम लोन इंटरेस्ट, वगैरह।
  2. उन डिडक्शन्स के बाद old regime में अपनी टैक्स देनदारी कैलकुलेट करें।
  3. अपनी ग्रॉस इनकम और स्टैंडर्ड डिडक्शन का इस्तेमाल करके new regime में टैक्स देनदारी कैलकुलेट करें।
  4. दोनों नंबर्स कंपेयर करें — जो कम है, वही उस साल के लिए बेहतर है।
  5. सैलरीड कर्मचारी हर फाइनेंशियल ईयर में बदल सकते हैं; बिज़नेस इनकम वालों के लिए ज़्यादा पाबंदियां हैं, इसलिए डिफॉल्ट से ऑप्ट-आउट करने से पहले ध्यान से प्लान करें।

खुद अपने नंबर्स चेक करें

Old vs new tax regime के फैसले के लिए सिर्फ अंदाज़े पर भरोसा न करें — सही जवाब आपकी सैलरी स्ट्रक्चर और निवेश के हिसाब से बदलता है। फाइल करने से पहले दोनों रीजीम में अपनी असली देनदारी कंपेयर करने के लिए हमारा मुफ्त Tax Calculator इस्तेमाल करें।

Old vs New Tax Regime — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अभी कौनसा रीजीम डिफॉल्ट है?
New tax regime सभी individuals, HUFs, AOPs और BOIs के लिए डिफॉल्ट है, जब तक आप खासतौर पर ऑप्ट-आउट न करें।

क्या मैं हर साल रीजीम बदल सकता हूं?
हां, अगर आपकी कोई बिज़नेस या प्रोफेशनल इनकम नहीं है, तो आप हर साल अपनी ITR में सीधे अपना रीजीम चुन सकते हैं।

क्या 80C जैसे डिडक्शन्स new regime में मिलते हैं?
ज़्यादातर Chapter VI-A डिडक्शन्स, जिनमें 80C और 80D शामिल हैं, new regime में उपलब्ध नहीं हैं, कुछ खास अपवादों को छोड़कर जैसे 80CCD(2) के तहत एम्प्लॉयर का NPS कॉन्ट्रिब्यूशन।

क्या स्टैंडर्ड डिडक्शन दोनों रीजीम में लागू होता है?
हां, सैलरीड लोगों को old और new, दोनों तरह के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है।

दोनों रीजीम की पूरी, आधिकारिक तुलना के लिए Income Tax Department की आधिकारिक FAQs old vs new tax regime पर देखें।

— धनमैत्री डेस्क
हर भारतीय के लिए सरल वित्तीय ज्ञान