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विक्रम के लिए वो एक आम मंगलवार था।

नागपुर की एक logistics कंपनी में स्थिर नौकरी। दो बच्चे स्कूल में। घर के loan की छोटी EMI। ज़िंदगी थोड़ी तंग थी — लेकिन चल रही थी।

फिर फोन आया। कंपनी छँटनी कर रही है। दो हफ्ते में आखिरी दिन।

विक्रम के पास कोई बचत नहीं थी। कोई इमरजेंसी फंड नहीं। सैलरी अकाउंट में ₹4,200 थे।

अगले छह महीने उसकी ज़िंदगी के सबसे मुश्किल महीने थे।


इमरजेंसी फंड क्या होता है?

इमरजेंसी फंड वो पैसा है जो आप अलग रखते हैं — न निवेश के लिए, न खर्च के लिए — सिर्फ तब के लिए जब ज़िंदगी अचानक कुछ मुश्किल डाल दे।

नौकरी जाना। अचानक बीमारी। घर या गाड़ी की ज़रूरी मरम्मत। परिवार का कोई संकट। ये सब appointment लेकर नहीं आते।

इमरजेंसी फंड आपकी financial airbag है। उम्मीद है कभी काम न आए। लेकिन जब आए — तो आप बहुत खुश होते हैं कि यह था।


कितना रखना चाहिए?

सरल नियम: अपने मासिक खर्च का 3 से 6 गुना।

सैलरी का नहीं। खर्च का।

मासिक खर्चन्यूनतम इमरजेंसी फंडआदर्श इमरजेंसी फंड
₹10,000₹30,000₹60,000
₹20,000₹60,000₹1,20,000
₹30,000₹90,000₹1,80,000

अगर आप पर आश्रित हैं (माता-पिता, बच्चे), या आमदनी अनियमित है (फ्रीलांसर, छोटा कारोबार), तो 3 नहीं — 6 महीने का लक्ष्य रखें।


कहाँ रखें इमरजेंसी फंड?

यह बहुत ज़रूरी है। आपका इमरजेंसी फंड होना चाहिए:

आसानी से निकाल सकें — 24 घंटे के अंदर पैसा मिल जाए

रोज़ की बचत से अलग — अगर उसी अकाउंट में है तो खर्च हो जाएगा

शेयर या म्यूचुअल फंड में नहीं — जब ज़रूरत हो, ठीक तभी बाज़ार गिरा हो सकता है

भारतीयों के लिए बेहतर विकल्प:

अलग बैंक का Savings Account: कोई जोखिम नहीं, तुरंत निकाल सकते हैं। पहले ₹25,000–₹50,000 के लिए सबसे अच्छा।

Liquid Mutual Fund: FD से थोड़ा बेहतर return, 1 कार्य दिवस में पैसा मिल जाता है। ₹50,000 से ऊपर के लिए अच्छा।

Sweep-in FD: FD में पैसा रहता है — ब्याज कमाता है, लेकिन savings account की तरह निकाला जा सकता है। ज़्यादातर बैंकों में उपलब्ध।


बिना तकलीफ के कैसे बनाएं?

सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं: एक साथ पूरा इमरजेंसी फंड बनाने की कोशिश करते हैं और हार मान लेते हैं।

ऐसा मत करो।

छोटे से शुरुआत करो। ₹1,000 महीना ठीक है। ₹500 भी चलेगा।

₹15,000 मासिक आमदनी वाले के लिए एक आसान 12 महीने की योजना:

महीनामासिक योगदानकुल जमा
1–3₹1,000₹3,000
4–6₹1,500₹7,500
7–12₹2,000₹19,500

12 महीनों में लगभग ₹20,000 — ज़्यादातर छोटी इमरजेंसी के लिए काफी, और मन को बड़ा सुकून।


नियम: सिर्फ असली इमरजेंसी में निकालें

इमरजेंसी फंड इनके लिए नहीं है:

  • Electronics की sale
  • अचानक प्लान हुई छुट्टी
  • पिछले महीने का overspending cover करना

यह इनके लिए है:

  • नौकरी जाना या अचानक तनख्वाह कटना
  • Insurance से cover न होने वाले medical खर्च
  • घर या गाड़ी की ज़रूरी मरम्मत
  • परिवार का वो संकट जिसमें तुरंत पैसा चाहिए

जब भी निकालें — दोबारा बनाएं। यही अनुशासन है।


मुख्य बातें याद रखें

  • इमरजेंसी फंड = मासिक खर्च का 3–6 गुना, अलग रखा हुआ
  • यह निवेश नहीं है — यह बाकी सब को बचाने की ढाल है
  • अलग savings account, liquid fund या sweep-in FD में रखें
  • ₹500–₹1,000 महीने से शुरू करें — रकम सोचने से जल्दी बढ़ती है
  • सच्ची इमरजेंसी में ही निकालें — फिर तुरंत दोबारा बनाएं

अपना हिसाब खुद लगाएं

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: मेरे पास credit card है। क्या वही काफी नहीं?
नहीं। credit card कर्ज़ है — ब्याज सहित चुकाना पड़ता है (सालाना 24–40%)। इमरजेंसी फंड आपका अपना पैसा है। न चुकाना, न ब्याज, न टेंशन।

सवाल: मेरी EMI चल रही है। पहले इमरजेंसी फंड बनाऊं या EMI भरूं?
पहले कम से कम 1 महीने के खर्च का buffer बनाएं। इससे संकट में EMI miss नहीं होगी — जो credit score खराब कर सकती है।

सवाल: परिवार मदद करता है इमरजेंसी में। तो क्या फिर भी ज़रूरत है?
परिवार का साथ अनमोल है। लेकिन उसकी भी सीमा होती है। और पैसे के लिए किसी से माँगना रिश्तों में तनाव लाता है। खुद का इमरजेंसी फंड मतलब — कभी माँगना न पड़े।

सवाल: क्या घर में नकद रखें?
थोड़ा नकद (₹2,000–₹5,000) तुरंत ज़रूरत के लिए ठीक है। लेकिन बड़ी रकम घर में खतरनाक है — चोरी, नुकसान, और ब्याज भी नहीं। बैंक account बेहतर है।


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— धनमैत्री डेस्क